नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उनकी टैरिफ नीतियों को उनके ही देश में आलोचना हो रही है। अमेरिका के पूर्व एनएसए से लेकर उच्च पदों पर आसीन कई लोग टैरिफ मामले में ट्रंप के खिलाफ हैं। अमेरिका की फेडरल कोर्ट ने भी ट्रंप के टैरिफ को अवैध ठहरा दिया है। वहीं अब ऐसी जानकारी मिल रही है कि ट्रंप की टैरिफ नीतियों के विरोध में अमेरिकी संसद में प्रस्ताव लाया जा सकता है। अमेरिका के विदेश मामलों की कमेटी डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ पर एक्शन ले सकती है। अगर ऐसा हुआ तो यह ट्रंप के लिए दोहरा झटका होगा।
डेमोक्रेटिक सांसद ग्रेगरी मीक्स ने हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव्स के स्पीकर माइक जॉनसन से अपील करते हुए कहा है कि टैरिफ खत्म करने के प्रस्ताव पर विचार किया जाए। ग्रेगरी ने कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए कहा कि टैरिफ खत्म करने के लिए मेरे प्रस्तावों को स्पीकर जॉनसन को सदन में रखना चाहिए। आपको बता दें कि अमेरिका की फेडरल कोर्ट ने कहा कि ट्रंप के ज्यादातर वैश्विक टैरिफ गैरकानूनी हैं। हालांकि कोर्ट ने टैरिफ को 14 अक्टूबर तक लागू रखे जाने की छूट दी है। दूसरी तरफ ट्रंप प्रशासन के कुछ अधिकारियों के द्वारा रूस से तेल खरीदने पर भारत की आलोचना किए जाने पर अमेरिकी ज्यूश कमेटी ने प्रतिक्रिया दी है और भारत का पक्ष लिया है।
कमेटी की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि रूस और यूक्रेन संकट के लिए भारत को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता है। साथ ही भारत को एक सहयोगी लोकतांत्रित देश और अमेरिका का महत्वपूर्ण रणनीतिक पार्टनर बताया है। गौरतलब है कि व्हाइट हाउस के व्यापारिक सलाहकार पीटर नवारो ने भारत पर निशाना साधते हुए कहा था कि रूस और यूक्रेन संकट मोदी का युद्ध है। ट्रंप ने भी कहा था कि भारत पर रूस से तेल खरीदने के लिए 50 फीसदी टैरिफ लगाया गया है।
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